एतबार

आज जब इस्राईल और फ़िलिस्तीन
एक दूसरे पर मिसाइल दाग़ रहे हैं
मेरी बेटी और उसके दोस्त अपनी यूनिवर्सिटी के
किसी शांत कोने में
एक घेरे में बैठकर
इस शाम को कुछ हसीन बना रहे हैं
वे मिलकर प्रेम गीत गा रहे हैं
उनका यौवन आनेवाले कल के
अमन- ओ- चैन पर एतबार करता है
अपने सपनों पर पीठ टिकाए
मुस्कुराता हुआ बैठा है
और गुनगुना रहा है।

संवेदना , २०२३